जन्मआष्ट्मी

इस साल खास क्यों हैं जन्माष्टमी

1. अष्टमी तिथि + रोहिणी नक्षत्र का मेल15 अगस्त की रात 11:49 से 16 अगस्त की रात 21:34 तक भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि रहेगी, लेकिन रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त सुबह 4:38 बजे शुरू होगा ।इसका मतलब है कि जन्माष्टमी की शुभ रात में अष्टमी तिथि तो पूरी तरह मौजूद है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र नहीं—फिर भी ज्योतिषियों का मानना है कि ऐतिहासिक रूप से कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में ही हुआ था।

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2. सर्वार्थ सिद्धि योग + अमृत सिद्धि योग माध्यरात में इस योगा का बनना और भी अधिक शुभ बना रहा हैं।

3. निशिता मुहूर्त

रात्रि 12:04 -12:48 तक का शुभ महूर्त माना जाता हैं।

ये 43-44 मिनट ही पूजा अर्जना के लिए शुभ माना जाता हैं।

मध्यरात्रि का पवित्र पल 12:26 पर आएगा।

2025 का जन्मआष्ट्मी समय या कैलेंडर

घटना समय और दिन

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यह भगवान श्री कृष्ण की असाधारण गतिविधियों का मूल विवरण है।

अष्टमी तिथि शुरू 15 अगस्त, रात 11:49 बजेअष्टमी तिथि समाप्त 16 अगस्त, रात 21:34 बजेनिशिता पूजा मुहूर्त 16 अगस्त, 00:04–00:47 बजेमध्यरात्रि क्षण 16 अगस्त, लगभग 00:26 बजेपारण (उपवास तोड़ना) 17 अगस्त, सुबह 05:51 बजे सेरोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त, सुबह 04:38 बजे से 18 अगस्त, सुबह 03:17 बजे तक

जन्मआष्ट्मी सारांश

इस साल जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को, विशेष ज्योतिषीय संयोगों—अष्टमी तिथि, निशिता मुहूर्त व सिद्धि योग—के कारण बेहद शुभ और अध्यात्म मलिन रूप में मनाई जाएगी।मध्यरात्रि 12:04–12:47 बजे के विशेष पूजा समय के साथ, भक्तों को आध्यात्मिक लाभ, आनंद और भक्ति की गहरी अनुभूति होगी।—अगर आप पूजा विधि, मंत्र, या कौन-कौन सी सजावटी चीजें इस जन्माष्टमी पर उपयोग हो सकती हैं—जैसे झूले या वास्तु नियम—तो मैं वह जानकारी भी जुटा सकता हूँ।आप कौन से पहलुओं में अधिक विस्तार चाहेंगे—मनोरंजक लीलाएँ, पूजा विधियाँ, या शुभ मुहूर्तों का महत्व?

जन्मआष्ट्मी : भगवान श्री कृष्णा का उत्सव हैं।

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भारत में त्यौहार सिर्फ तिथि का इंतजार करना नहीं होता हैं बल्कि ये तिथि किसी भावना, भक्ति से जुडी होती हैं। जन्मआष्ट्मी भी उन्ही पवित्रउत्सव में से एक है।

ये त्यौहार पुरे भारत में बड़े प्रेम भाव से मनाया जाता हैं। इस दिन पूरा संसार आनंद और भगवान श्री कृष्णा के प्रेम में डूबा रहता हैं। भगवान श्री कृष्णा जी विष्णु जी के आठवे अवतार माने जाते हैं और उनकी ही याद में ये पर्व मनाया जाता हैं।

भगवान् श्री कृष्णा जी जो जन्म हुआ था वो राजा कंस का वध करने के लिए हुआ था।

भगवान श्री कृष्णा जन्म भद्रपद की मास कृष्ण पक्ष की अष्ठमी तिथि को, माध्यरात्रि में, मथुरा के कारागार में हुआ था। उनके माता पिता देवकी -वासुदेव थे, जिन्हे कंस ने कैद कर रखा था।

एक बार भविष्यवाणी हुई थी के देवकी का आठवा पुत्र कंस का अंत करेगा। इसलिए जैसे ही श्री कृष्णा का जन्म हुआ, वाशु देव उन्हें यमुना पार गोकुल छोड़ आये। जहां नन्द जी और यशोदा जी ने इनका पालन किया।

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